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Sunday, May 17, 2015
Sir, fishing is best remedy for headache. ;-) :-P
"Sir, Just ONE sale." said the young salesman.
"What"," How did you manage that?" asked the flabbergasted boss.
"No" answered the salesman, "he came in to buy a headache relief tablet and I said to him, "Sir, fishing is best remedy for headache "
Thursday, July 10, 2014
शांतिपूर्ण और सुखमय विवाहित जीवन
एक दंपत्ति ने जब अपनी शादी की 25 वीं वर्षगांठ मनाई तो एक स्थानीय समाचार पत्र का संवाददाता उनका साक्षात्कार लेने उनके घर जा पहुंचा। दरअसल वे दंपत्ति अपने शांतिपूर्ण और सुखमय विवाहित जीवन के लिये पूरे कस्बे में प्रसिध्द हो चुके थे। उनके बीच कभी कोई तकरार नाम मात्र के लिये भी नहीं हुई।
संवाददाता उनके सुखी जीवन का राज जानने के लिये उत्सुक था।
पति ने बताया कि हमारी शादी के फौरन बाद हम लोग हनीमून मनाने के लिये शिमला गये हुये थे। वहां हम लोगों ने घुड़सवारी की। मेरा घोड़ा तो ठीक था पर जिस घोड़े पर मेरी पत्नी सवार थी वह जरा सा नखरे बाज़ था। उसने दौड़ते दौड़ते अचानक मेरी पत्नी को नीचे गिरा दिया। मेरी पत्नी उठी उसने घोड़े की पीठ पर हाथ फेरते हुये कहा, 'यह पहली बार है और फिर उसी घोड़े पर सवार हो गई'। थोड़ी दूर चलने के बाद घोड़े ने फिर उसे नीचे गिरा दिया। पत्नी ने अबकी बार कहा, 'यह दूसरी बार है' और फिर उसी घोड़े पर सवार हो गई। तीसरी बार जब घोड़े ने उसे नीचे गिराया तो मेरी पत्नी ने घोड़े से कुछ नहीं कहा, बस अपने पर्स से पिस्तौल निकाली और घोड़े को गोली मार दी।
मैं अपनी पत्नी पर चिल्लाया, "ये तुमने क्या किया? तुमने एक बेजुबान जानवर को मार दिया, क्या तुम पागल हो गई हो?"
पत्नी ने मेरी तरफ देखा और कहा, "ये पहली बार है।"
और बस, तभी से हमारी जिंदगी सुख और शान्ति से चल रही है।
साभार: www.santabanta.com
Wednesday, June 11, 2014
COMPLIMENTS THAT AREN’T ABOUT PHYSICAL APPEARANCE
1) You’re empowering.
2) I like your voice.
3) You’re strong.
4) I think your ideas/beliefs matter.
5) I’m so happy you exist.
6) More people should be listening to what you have to say.
7) You’re a very warm hearted person.
8) It’s nice seeing such kindness.
9) You’re very down to earth.
10) You have a beautiful soul.
11) You inspire me to become a better person.
12) Our conversations bring me a lot of joy.
13) It’s good to see someone care so much.
14) You’re so understanding.
15) You matter a lot to me.
16) You’re important even if you don’t think so.
17) You’re intelligent.
18) Your passion is contagious.
19) Your confidence is refreshing.
20) You restore my faith in humanity.
21) You’re great at being creative.
22) You’re so talented at ____.
23) I don’t get tired of you the way I get tired of other people.
24) You have great taste in ___.
25) I’m happy I stayed alive long enough to meet you.
26) I wish more people were like you.
27) You’re so good at loving people.
Thursday, March 27, 2014
वह महान इंजिनियर
तब देश में अंग्रेजों का शासन था। एक दिन बंबई मेल यात्रियों से खचाखच भरी हुई तेज गति से दौड़ी जा रही थी। यात्रियों में अधिकतर अंग्रेज थे। पर एक डिब्बे में सांवले रंग का धोती-कुर्ता पहने एक भारतीय यात्री गुमसुम बैठा था। सभी अंग्रेज यात्री उसे बेवकूफ समझ कर उस पर व्यंग्य कर रहे थे। कुछ देर बाद अचानक उस व्यक्ति ने उठ कर रेल की जंजीर खींच दी। गाड़ी की रफ्तार धीमी पड़ गई। उस व्यक्ति को अन्य यात्री बुरा-भला कहने लगे।
जब रेल रुकी तो गार्ड अंदर आया और उसने पूछा कि जंजीर किसने और क्यों खींची है? इस पर वह व्यक्ति बोला, 'जंजीर मैंने खींची है। मुझे ऐसा अनुमान हुआ कि यहां से लगभग एक फर्लांग दूर रेल की पटरी उखड़ी हुई है।' गार्ड हैरानी से उस व्यक्ति को देखते हुए बोला, 'आपको कैसे पता लगा?' वह व्यक्ति बोला, 'दरअसल गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आ गया था। इससे प्रतिध्वनित होने वाली आवाज से मुझे खतरे का आभास हो गया।'
गार्ड उस व्यक्ति के साथ कुछ अन्य यात्रियों को लेकर एक फर्लांग से आगे पहुंचा और यह देखकर गार्ड के साथ अन्य लोग भी दंग रह गए कि वास्तव में एक जगह रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए थे और नट-बोल्ट अलग पड़े थे। अब सभी लोग उस व्यक्ति की सराहना करने लगे। गार्ड ने उससे पूछा, 'आप कौन हैं? आपका क्या नाम है?' वह व्यक्ति सहज भाव से बोला, 'मैं एक इंजिनियर हूं, और मेरा नाम डॉ. एम. विश्वेश्वरैया है।' नाम सुनते ही सब सन्न रह गए। डॉ. एम. विश्वेश्वरैया का नाम देश के महान इंजिनियरों में गर्व से लिया जाता है।
नवभारत टाइम्स से साभार
Friday, December 20, 2013
कैसे मन में जगता है किसी के प्रति प्रेम और लगाव अध्यात्मिक गुरू / श्री श्री रविशंकर
किसी इन्द्रिय-संबंधित पदार्थ के साथ बारंबार संगत उसके लिए लालसा उत्पन्न करती है। हो सकता है तुम्हें हर सुबह कॉफी पीने की आदत हो, जबकि तुम कॉफी के चाव से पैदा नहीं हुए थे, तुमने अपने भीतर उसकी आदत प्रारंभ कर दी है, उसी ने लालसा को उत्पन्न किया है। ये सब कैसे शुरू हुआ?
कॉफी पीने की आदत कोई एक दिन में नहीं बनी! व्यसन किसी खास वस्तु के पुनरावर्ती अनुभव से प्रारंभ होता है। वो आदत बन जाती है- और आदत का स्वभाव है कि वह तुम्हें आनंद नहीं देती वह पीड़ा देती है। अतः कॉफी पीना तुम्हें स्वर्ग में लेकर नहीं जाएगी लेकिन यदि तुम नहीं पियोगे तब तुम नरक में होने जैसा महसूस कर सकते हो।
किसी खास इन्दिय-संबंधित वस्तु का पुनरावर्ती अनुभव या संगत तुम्हें उसे और भी पाने की इच्छा करवाता है। तुम उसके बारे में सोचते हो और वह उसे और भी पाने की संवेदना उत्पन्न करता है। तुम तंत्रिका तंत्र में जहां भी ध्यान देते हो, उस वस्तु के लिए तुम्हारी लालसा आरंभ हो जाती है।
संगति के साथ आती है इच्छा और इच्छा के साथ आता है क्रोध। जब भी व्यक्ति क्रोधित होता है। उस क्रोध के पीछे इच्छा होती है। चाहे पूरी हो या न हो, इच्छा क्रोध की ओर ले जाती है।
तो तुम किसी पर गुस्सा होते हो। दूसरा कदम है तुम उनसे अनुरक्त हो जाते हो। अब जब भी तुम किसी पर क्रोधित होगे, कभी न कभी पछताओगे, पश्चाताप और भी लगाव लाता है। पश्चाताप करने से तुम व्यक्ति या परिस्थिति से दूर नहीं जाते, उसके और भी नजदीक जाते हो। ये सब सूक्ष्म रूप में होता है।
क्या तुमने देखा है कि तुम जिस पर भी क्रोध या घृणा करते हो, उस व्यक्ति के बारे में तुम अपने से भी अधिक सोचते हो? और जैसे तुम उस व्यक्ति के बारे में सोचते हो, तुम उत्तेजित व व्यथित हो जाते हो। दूसरी ओर, जब तुम उस व्यक्ति के बारे में सोचते हो, जिससे तुम प्रेम करते हो, तुम्हें अच्छा लगता है और तुम्हारी तंत्रिका तंत्र वैसा ही रूप ग्रहण कर लेती है।
जब तुम्हारा तंत्रिका तंत्र इनमें से कोई भी रूप ग्रहण करता है, वह वैसा ही बन जाता है और तुम उस प्रकार के लोगों की ओर खींचते चले जाते हो। यह उलझे हुए अनुचित संबंध हैं। इसलिए ग्रस्तता क्रोध लाती है और ये अनुचित संबंध लाती है।
साभार अमर उजाला