Monday, January 2, 2012

वो किसी का हो गया है, उसको क्यों कर ढूँढ़िये?

वो किसी का हो गया है, उसको क्यों कर ढूँढ़िये?
दिल से आज जो गया है, उसको क्यों कर ढूँढ़िये?
ज़िन्दग़ी सीम आब है कब हाथ आई है भला
मिल के भी जो खो गया है उसको क्यों कर ढूँढ़िये?
प्यार की ख़ातिर जो रोया ज़िन्दग़ी की शाम तक
ले के नफ़रत से गया है उसको क्यों कर ढूँढ़िये?
ढूँढ़कर लाया था दुनिया भर की खुशियाँ जो कभी
ढूँढ़ने ख़ुद को गया है उसको क्यों कर ढूँढ़िये?
ढूँढ़िये ‘मख़मूर’ उसको जो कहीं दुनिया में हो
दिल की तह तक जो गया है उसको क्यों कर ढूँढ़िये?

Lyrics: Arun Makhmoor
Singer: Raj Kumar Rizvi

Thursday, December 22, 2011

तजुर्बा तेरी मोहब्बत का


उनको ये शिकायत है कि मै बेवफ़ाई पे नहीं लिखता और मै सोचता हुं कि मै उनकी रुसवाई पे नहीं लिखता,
खुद अपने से ज्यादा बुरा जमाने मै कौन है?? मै इसीलिये औरों की बुराई पे नहीं लिखता,
कुछ तो आदत से मजबूर हुं और कुछ फ़ितरतों की पसन्द है, जख्म कितने भी गहरे हों मै उनकी दुहाई पे नहीं लिखता,
दुनिया का क्या है हर हाल मे इल्ज़ाम लगाती है, वरना क्या बात कि मैं कुछ अपनी सफ़ाई पे नहीं लिखता,
शान-ए-अमीरी पे करू कुछ अर्ज़ मगर एक रुकावट है, मेरे उसूल हैं मैं गुनाहों की कमाई पे नही लिखता,
उसकी ताक़त का नशा "मंत्र और कलमे" में बराबर है !! मेरे दोस्तों!! मैं मज़हब की, लड़ाई पे नही लिखता,
समंदर को परखने का मेरा, नज़रिया ही अलग है यारों!! मिज़ाज़ों पे लिखता हूँ मैं उसकी गहराई पे नही लिखता,
पराए दर्द को , मैं ग़ज़लों में महसूस करता हुं , ये सच है मैं शज़र से फल की, जुदाई पे नही लिखता,
"तजुर्बा तेरी मोहब्बत का" ना लिखने की वजह बस ये!! क़ि 'शायर' इश्क़ में ख़ुद अपनी, तबाही पे नही लिखता...

Sunday, December 18, 2011

श्रीलाल शुक्ल... एक परिचय

हिन्दी साहित्य के मशहूर साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल का जन्म 31 दिसंबर 1925 ई. में उत्तर प्रदेश के लखनऊ के अतरौली में हुआ था। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे श्रीलाल शुरुआत से ही मेधावी छात्र थे। इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद 1948 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की और लॉ में दाखिला लिया। हालांकि इस बीच विवाह हो जाने से पढ़ाई में बाधा आ गई और वे कानून की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। 1949 में इन्होंने उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में भाग लिया और सफल भी रहे।
श्रीलाल शुक्ल को एक रेडियो नाटक सुनकर लिखने की प्रेरणा मिली और इन्होंने स्वर्णग्राम एवं वर्षा नामक लेख लिखा। यह लेख 'निकर्ष' में प्रकाशित हुआ। इसके बाद से लिखने का सिलसिला शुरू हो गया। 1938 में सरकारी सेवा से मुक्त होने के बाद श्रीलाल अपने पैतृक घर लखनऊ में रहकर निरंतर साहित्य सेवा में जुटे रहे और एक के बाद एक कई कालजयी रचनाएं लिखी।
श्रीलाल शुक्ल का पहला उपन्यास 'सूनी घाटी का सूरज' (1957) था। 1958 में प्रकाशित 'अंगद का पांव' उनका पहला व्यंग्य माना जाता है। भारत के ग्रामीण जीवन पर कटाक्ष करने वाले उपन्यास 'राग दरबारी' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शुक्ल की रचनाएं का दायरा काफी विस्तृत था। उन्होंने उपन्यास, कहानी संग्रह, व्यंग्य, आलोचना, निबंध और बाल साहित्य में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उपन्यास - राग दरबारी, सूनी घाटी का सूरज, अज्ञातवास, आदमी का ज़हर, सीमाएं टूटती हैं, मकान, पहला पड़ाव, विश्रामपुर का संत, अंगद का पांव, यहां से वहां, उमरावनगर में कुछ दिन। कहानी संग्रह - यह घर मेरा नहीं है, इस उम्र में। आलोचना - अज्ञेय: कुछ राग और कुछ रंग। निबंध - भगवती चरण वर्मा, अमृतलाल नागर। बाल साहित्य - बढबर सिंह और उसके साथी।
भारत के गांवों पर जो भी उपन्यास और कहानियां लिखी गई हैं उनमें 'गोदान', 'मैला आंचल' और 'राग दरबारी' सर्वाधिक यथार्थवादी उपन्यास है। इसमें व्यंग्य इसके गेटअप को ज्यादा चमक देता है और ज्यादा पठनीय बनाता है। रागदरबारी अपने आप में एक अलग उपन्यास है जो व्यंग्य में ऐसे डूबा है जैसे कि चाशनी में जलेबी डूबी रहती है। यह व्यंग्य अपनी मिठास के बाबजूद एक अलग शक्ल और रंगरूप से अपनी पहचान रखती है। गांवों पर थोपी गई नैतिकता की असलियत का जो पर्दा श्रीलाल शुक्ल ने उठाया है उसके पीछे तो सभी ने झांका हुआ था, पर सच कहने का साहस केवल उन्होंने ही उठाया।
  श्री लाल शुक्ल को इसी महीने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया था। श्री शुक्ल को यह पुरस्कार अस्पताल में ही 19 अक्टूबर को दिया गया। दो दिन पूर्व ही श्रीलाल शुक्ल को सांस में तकलीफ के बाद लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। श्रीलाल शुक्ल ने राग दरबारी, मकान, सूनी घाटी का सूरज, पहला पड़ाव, अज्ञातवास तथा विश्रामपुर का संत आदि कालजयी रचनाओं के माध्यम से साहित्य जगत में अपनी एक प्रतिष्ठित पहचान बनाई। स्वतंत्रता बाद के भारतीय ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत दर परत उघाड़ने वाले उपन्यास 'राग दरबारी' (1968) के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके इस उपन्यास पर धारावाहिक का निर्माण भी हुआ। श्रीलाल शुक्ल को भारत सरकार ने 2008 मे पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था।

Proud to be an Indian....


Proud to be an Indian....

एक अमेरिकन बोला भाई साहब बताइये अगर आपका भारत महान है..तो सँसार के इतने अविष्कारों में आपके देश का क्या योगदान है.??
हिन्दुस्तानी - अरे अमरीकन सुन..
सँसार की पहली फायर प्रूफ लेडी भारत में हुई..
... नाम था "होलिका" आग में जलती नही थी.. इसीलिए उस वक्त फायर ब्रिगेड चलती नही थी!!
...
सँसार की पहली वाटर प्रूफ बिल्डिँग भारत में हुई..
... नाम था भगवान विष्णु का "शेषनाग".. काम तो ऐसे जैसे "विशेषनाग"
दुनिया के पहले पत्रकार भारत में हुए..
"नारदजी" जो किसी राजव्यवस्था से नही डरते थे .. तीनों लोक की सनसनी खेज रिपोर्टिँग करते थे !!
दुनिया के पहले कॉँमेन्टेटर "सँजय" हुऐ जिन्होंने नया इतिहास बनाया .. महाभारत के युद्ध का आँखो देखा हाल अँधे"ध्रतराष्ट" को उन्ही ने सुनाया !!
दादागिरी करना भी दुनिया हमने सिखाया क्योंकि वर्षो पहले हमारे "शनिदेव" ने ऐसा आतँक मचाया .. कि "हफ्ता" वसूली का रिवाज उन्ही के शिष्यो ने चलाया.. आज भी उनके शिष्य हर शनिवार को आते है ! उनका फोटो दिखाकर हफ्ता ले जाते है !!
अमेरिकन बोला दोस्त फालतू की बातें मत बनाओ! कोई ढँग का आविष्कार हो तो बताओ !!!!! (जैसे हमने इँसान की किडनी बदल दी, बाईपास सर्जरी कर दी आदि)
हिन्दुस्तानी बोला रे अमरीकन सर्जरी का तो आइडिया ही दुनिया को हमने दिया था ! तू ही बता"गणेशजी" का ऑपरेशन क्या तेरे बाप ने किया था..!!
अमरीकन हडबडाया.. गुस्से मैँ बडबडाया ! देखते ही देखते चलता फिरता नजर आया !!
तब से पूरी दुनिया को हमपर मान है !!! दुनिया में मुल्क कितने ही हो पर सबमें मेरा
"भारत" महान है......!!!

Saturday, December 17, 2011

Coolest doubt in Mahabharata.. lolz


Coolest doubt in Mahabharata

In some remote village of India,
one masterji is teaching the Mahabharat katha to class 6 students.
He is at the krishnajanma' part of it.


Masterji:
"Kansa heard the akashwani that his sister's 8th child is going to kill him.
He was furious.
He ordered to put vasudev n devki behind the bars.
First son is born, and kansa kills him by poisoning...
Second one is born n kansa throws him off the mountain peak.
Third one is born."

Now Ramu, who is smartest of the lot, puts up his hand.

Ramu :

"Masterji, I have a doubt"
(sounding nervous n confused)


Masterji:
"Ramu bete,
whole India does not have doubt in Mahabharata then how come u have one?"


Ramu :
"Masterji, if Kansa knew that Devaki's 8th child was going to kill him,


*WHY THE HELL DID HE PUT VASUDEV AND DEVAKI IN THE SAME CELL??* "


Masterji fainted...???...   :-P